हरिद्वार का 54 करोड़ी भूमि घोटाला: सस्पेंड IAS कर्मेंद्र सिंह और वरुण चौधरी को झटका, केंद्र ने 6 महीने बढ़ाया निलंबन
देहरादून/हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित 54 करोड़ रुपये के भूमि खरीद घोटाले में फंसे उत्तराखंड काडर के दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य सरकार के बाद अब केंद्र सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) कर्मेंद्र सिंह और तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी के निलंबन (Suspension) को अगले छह महीने के लिए और बढ़ाने का फैसला किया है।
गृह सचिव शैलेश बगौली ने दोनों आईएएस अफसरों के निलंबन की अवधि बढ़ाए जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद अब ये दोनों वरिष्ठ अधिकारी नवंबर 2026 तक सस्पेंड रहेंगे। शासन के सूत्रों के मुताबिक, इस महा-घोटाले की जांच अभी अंतिम चरण में है और कड़ियां जोड़ी जा रही हैं, इसी वजह से निलंबन को बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
क्या है 54 करोड़ का पूरा भूमि खरीद प्रकरण?
यह पूरा मामला साल 2024 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई करीब 33 बीघा जमीन की खरीद से जुड़ा हुआ है। इस मामले में नियम-कायदों को ताक पर रखने के कई गंभीर आरोप हैं:
आचार संहिता का उल्लंघन: आरोप है कि जब सूबे में निकाय चुनाव के चलते आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू थी, उस दौरान नियमों को दरकिनार कर लगभग 54 करोड़ रुपये में इस भूमि की डील फाइनल की गई।
कचरा डंपिंग ज़ोन की जमीन को कौड़ियों के भाव से ऊंचे दामों में खरीदा: जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि जिस जमीन को करोड़ों की भारी-भरकम रकम देकर खरीदा गया, उसके आसपास लंबे समय से शहर का कूड़ा डंप किया जा रहा था। ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास होने के कारण इस जमीन की वास्तविक बाजार कीमत (Market Value) बेहद कम थी।
कृषि भूमि का लैंड यूज चेंज: सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए इस जमीन को कृषि श्रेणी (Agricultural Land) से गैर-कृषि में परिवर्तित कराया और फिर बेतहाशा ऊंचे दामों पर खरीदकर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया।
एसडीएम सहित 12 अधिकारी-कर्मचारी पहले से हैं सस्पेंड
मामले की गूंज जब शासन तक पहुंची, तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसकी उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई थी। शुरुआती जांच में ही बड़े पैमाने पर वित्तीय कूटरचना और अनियमितताएं पाए जाने पर तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह सहित कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया था।
इनमें से कई दागी अधिकारी पिछले एक साल से निलंबन की मार झेल रहे हैं। सरकार का साफ कहना है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले के बाद दोनों आईएएस अधिकारियों का निलंबन अगले छह माह तक प्रभावी रहेगा।





