Women Unity Forum Members Protesting at Main Gate of Maldhan Community Health Centreमालधन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट पर डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग को लेकर धरना देतीं महिला एकता मंच की कार्यकर्ता।
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मालधन CHC के गेट पर महिला एकता मंच ने दिया धरना। 40 हजार आबादी के लिए डॉक्टर, एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की मांग। 15 दिन का दिया अल्टीमेटम।

देवभूमि जन हुंकार, मालधन/रामनगर (05 अगस्त 2026): रामनगर क्षेत्र अंतर्गत मालधन में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और लचर चिकित्सकीय सुविधाओं को लेकर जन-आक्रोश फूट पड़ा है। आज महिला एकता मंच के बैनर तले मालधन क्षेत्र की दर्जनों महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मालधन के मुख्य द्वार पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल में मानकों के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और बुनियादी स्वास्थ्य जांच सुविधाएं तत्काल बहाल करने की पुरज़ोर मांग उठाई।

20 से अधिक गांवों की 40 हजार आबादी एकमात्र अस्पताल पर निर्भर

धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम का संचालन करते हुए विनिता ने कहा कि मालधन और आसपास के 20 से अधिक गांवों की लगभग 40 हजार से अधिक आबादी इसी एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आश्रित है। लेकिन विडंबना यह है कि यहाँ सिर्फ अस्पताल की बड़ी बिल्डिंग खड़ी है, जबकि अंदर न तो डॉक्टर हैं और न ही दवाइयां।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रसव (Delivery) और गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार दिए बिना सीधे रामनगर या हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है। इस रेफरल सिस्टम के चलते गरीब जनता का समय और पैसा दोनों बुरी तरह बर्बाद हो रहा है।

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यह हैं मालधन क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांगें:

  1. विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति: सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ की तत्काल स्थायी तैनाती की जाए।

  2. जांच व पैथोलॉजी सुविधाएं: एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सभी प्रकार की पैथोलॉजी जांच सुविधाएं अस्पताल परिसर में तुरंत चालू की जाएं।

  3. 24×7 आपातकालीन सेवाएं: 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं और पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।

  4. बुनियादी ढांचा: अस्पताल भवन में बिजली, पानी, स्वच्छ शौचालय और साफ-सफाई का समुचित प्रबंध किया जाए।

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 “वोट बैंक बनाया, सुविधाएं छीनीं”—नेताओं व सरकार पर बरसे वक्ता

सभा को संबोधित करते हुए पुष्पा और मंच की संयोजक ललिता रावत ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने मालधन को सिर्फ वोट बैंक समझा है। जिन विधायकों और सांसदों को जनता ने चुनकर भेजा, वे आज जनता के इस दुख-दर्द से पूरी तरह नदारद हैं।

वहीं भगवती ने कहा कि स्वास्थ्य जनता का बुनियादी अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष बाजार बंद और विधायक कार्यालय के घेराव के बाद अस्पताल में प्रसूति व अन्य सुविधाएं शुरू हुई थीं, लेकिन अब उन्हें भी बंद कर दिया गया है। यहाँ कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को दूसरी जगह अटैच (Attach) करके सरकार जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है।

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15 दिन में मांगें न मानी तो होगा उग्र आंदोलन

धरने में विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। इनमें समाजवादी लोक मंच के जगमोहन रावत, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी, मनमोहन अग्रवाल, जमन आर्य, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिमवाल, आसिफ, कौशल्या, ममता, देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।

महिला एकता मंच की वरिष्ठ पदाधिकारी सरस्वती जोशी ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिन के भीतर अस्पताल में सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो मालधन क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होगी।


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