उत्तराखंड में अवैध कॉलोनियों पर सर्जिकल स्ट्राइक: पंचायतों से छीना नक्शा पास करने का अधिकार, अब रेरा (RERA) की होगी सीधी नजर
देहरादून। उत्तराखंड में अनियंत्रित निर्माण और अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ धामी सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के आवास विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अधिसूचित क्षेत्रों (Notified Areas) में पंचायतों द्वारा नक्शा पास करने के अधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब किसी भी भवन या कॉलोनी के मानचित्र की स्वीकृति केवल विकास प्राधिकरणों (Development Authorities) के माध्यम से ही संभव होगी।
नियमों में बड़ा बदलाव: RERA पोर्टल से जुड़ेगी पूरी प्रक्रिया
सचिवालय में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस बदलाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
धारा 106 निरस्त: 2025 के संशोधित अधिनियम के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
प्राधिकरणों का वर्चस्व: अधिसूचित क्षेत्रों में अब पंचायतों की भूमिका समाप्त हो गई है और केवल विकास प्राधिकरण ही नक्शा पास करने के लिए अधिकृत होंगे।
डिजिटल पारदर्शिता: नक्शा पास कराने की पूरी प्रक्रिया को उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (RERA) के पोर्टल से जोड़ दिया गया है, ताकि हेराफेरी की गुंजाइश न रहे।
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अवैध कॉलोनियों पर नकेल और ‘कॉमन ड्राफ्ट’ की तैयारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियोजित क्षेत्रों के बाहर बनने वाली परियोजनाओं पर भी रेरा के माध्यम से कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अवैध निर्माण के खिलाफ पूरे प्रदेश में एक समान कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को एक ‘कॉमन ड्राफ्ट’ तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अब प्राधिकरण के क्षेत्रों से बाहर भी यदि कॉलोनियां विकसित होती हैं या भूखंडों का उपविभाजन (Sub-division) किया जाता है, तो उस पर रेरा की कानूनी कार्रवाई की तलवार लटकेगी।
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भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में राहत के संकेत
बैठक में जनता को बड़ी राहत देने पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में आवासीय परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर और व्यावसायिक उपयोग पर 1.5 गुना शुल्क लिया जाता है। आवास सचिव ने इस शुल्क संरचना में जनहित में संशोधन करने के संकेत दिए हैं और संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
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