हल्द्वानी में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) विधि प्रकोष्ठ के सदस्यता अभियान में मंच पर उपस्थित पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल और प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता मोहन कांडपाल
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जल, जंगल और जमीन पर पहला हक उत्तराखंडियों का ही होगा…”— यूकेडी विधि प्रकोष्ठ ने हल्द्वानी से भरी हुंकार, बूथ स्तर पर शुरू हुआ महा-अभियान!

हल्द्वानी/नैनीताल: उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन, मूल स्वाभिमान और राज्य आंदोलन की मूल जनभावनाओं की रक्षा के लिए उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के विधि प्रकोष्ठ ने हुंकार भर दी है। संगठन विस्तार और व्यापक सदस्यता अभियान के तहत हल्द्वानी में यूकेडी विधि प्रकोष्ठ द्वारा एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं और भारी संख्या में क्षेत्रीय युवाओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। इस दौरान देवभूमि के मूल जन-सरोकारों, बेरोजगारी, पलायन और संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत बनाने की रणनीति पर बेहद गंभीर व विस्तृत मंथन किया गया।

कार्यक्रम को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने भावुक और ओजस्वी शब्दों में कहा कि उत्तराखंड राज्य कोई खैरात में नहीं मिला है, बल्कि यह हमारे वीर आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष, लाठियों और सर्वोच्च बलिदानों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करने के लिए आज फिर सभी को एकजुट होना होगा।

वहीं, यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष भुवन जोशी ने दो टूक शब्दों में कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल और जमीन) पर पहला हक केवल और केवल यहाँ के मूल निवासियों का होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन, भयानक बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा जैसी गंभीर समस्याओं का स्थाई समाधान केवल मजबूत स्थानीय सोच और सशक्त क्षेत्रीय नेतृत्व से ही संभव है।

अधिकारों की रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर लड़ेगा विधि प्रकोष्ठ:

उत्तराखंड बार काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य राजन सिंह मेहरा ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उत्तराखंड आंदोलन केवल भौगोलिक राज्य निर्माण की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह हमारी अस्मिता, सम्मान, अधिकार और विशिष्ट पहाड़ी पहचान की लड़ाई थी।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक और यूकेडी विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता मोहन कांडपाल ने संगठन की भविष्य की रूपरेखा सामने रखते हुए कहा कि राज्य के मूल उद्देश्यों को पूरा करने के लिए संगठन को हर गांव और जमीनी स्तर तक ले जाना अनिवार्य है। उन्होंने संकल्प लिया कि विधि प्रकोष्ठ जनहित के मुद्दों, आम जनता के संवैधानिक अधिकारों और उत्तराखंड के हितों की कानूनी रक्षा के लिए कोर्ट से लेकर सड़क तक निरंतर संघर्षरत रहेगा।

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यूकेडी नैनीताल के जिलाध्यक्ष प्रताप चौहान ने कहा कि संगठन को बूथ स्तर तक पुनर्जीवित कर उत्तराखंड के मूल मुद्दों को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई गई, जिसमें कृष्णानंद जोशी द्वारा नए सदस्यों को सदस्यता ग्रहण कराने की औपचारिकता पूरी की गई, जबकि पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन खीम सिंह बोरा ने किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं और कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सपनों के अनुरूप रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के मुद्दों को पूरी ताकत से उठाने का संकल्प लिया। अंत में पूरा परिसर ‘जय उत्तराखंड’, ‘राज्य आंदोलन के शहीद अमर रहें’ और ‘उत्तराखंड क्रांति दल जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।

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इस अवसर पर केंद्रीय प्रवक्ता अशोक सिंह बोहरा, अनुसूचित मोर्चा अध्यक्ष रवि वाल्मीकि, केंद्रीय महामंत्री सुशील उनियाल, नारायण दत्त  तिवारी, नवीन ममगई, उमेश कुमार तिवारी ’’विश्वास’’, श्याम सिंह नेगी,  हरीश सिंह मेवाड़ी, महेश तिवारी, दीपक भारती, उत्तम सिंह बिष्ट, नरेश कुमार पांडे, लोकेश वर्मा, गोविंद सिंह गस्याल, नंदी पचौरी, भावना मेहरा, सुनीता जोशी, भवान सिंह बिष्ट, जगमोहन सिंह जलाल, मोहन सिंह नेगी, प्रमोद पांडे, जीवन सिंह बिष्ट, पूरन चंद्र आर्य और जितेंद्र पुनेठा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


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