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सावित्रीबाई फुले की जयंती पर महिला एकता मंच का आयोजन

देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती महिला एकता मंच ने ग्राम पूछडी न‌ई बस्ती में आम सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया ।

सभा का संचालन करते हुए शाइस्ता अन्सारी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका हैं। उन्होंने अपने समय में पुरातनपंथ, कट्टरपंथ व जातिवाद का जिस तरह से सामना किया उसकी प्रशंसा शब्दों में नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आज देश में 2 तरीके की शिक्षा व्यवस्था चलाई जा रही है ।अमीरों के लिए अलग स्कूल हैं,गरीबों के लिए अलग। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के सभी वर्गों के लिए दोहरी शिक्षा प्रणाली को खत्म कर एक जैसे स्कूल नहीं होंगे तब तक समाज में बराबरी संभव नहीं है।

सीमा तिवाड़ी ने बताया कि सावित्रीबाई फुले स्त्रियों की बराबरी की पक्षधर थीं। उन्होंने कहा था कि पितृ सत्तात्मक समाज यह कभी नहीं चाहेगा स्त्रियां उनकी बराबरी करें। आज हमें सावित्रीबाई की तरह से महिलाओं को वातवसंघर्षों को आगे बढ़ाते हुए सावित्रीबाई फुले को याद करते हुए महिलाओं को आगे आना चाहिए और हर महिला स्वयं को सावित्रीबाई फूले बनकर महिलाओं व समाज की बेहतर बनाने में अपना योगदान दे।

समाजवादी लोक मंच के राजेन्द्र ने कहा कि महिलाओं के साथ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है। महिलाएं न तो बाहर सुरक्षित हैं और न ही घर में। अपना जीवन बेहतर बनाने के लिए महिलाओं को स्वयं ही पहल लेनी होगी।

कार्यक्रम मे ,दीपा ध्यानी, धना तिवाड़ी, दुर्गा सैनी,अनीता, आदि द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में शान्ति मेहरा, कमला, परी,अनिता,तुलसी, मन्जू, आदि के द्वारा गीत व नृत्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।


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