Uttarakhand Protest Concept Representing Sundarkhal And Devichaura Villagers At Garjiya Chowkiरामनगर के गर्जिया चौकी के सामने चार सूत्रीय मांगों को लेकर धरना देते सुंदरखाल व देवीचौड़ा के ग्रामीण।
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देवभूमि जन हुंकार, रामनगर / नैनीताल: उत्तराखंड के रामनगर स्थित कॉर्बेट और कोसी बेल्ट के वन ग्रामों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा है। आज 21वीं सदी के इस दौर में भी सड़क, बिजली, पानी और पक्के अधिकारों जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित सुंदरखाल, देवीचौड़ा, धनगढ़ी और चौफुला खत्ता के सैकड़ों ग्रामीणों ने अपने मूल अधिकारों के लिए गर्जिया चौकी गेट के सामने एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

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चार सूत्रीय प्रमुख मांगें

धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में अपनी निम्नलिखित चार सूत्रीय मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं:

  1. राजस्व ग्राम का दर्जा: सुंदरखाल, देवीचौड़ा खत्ता, चौफुला खत्ता और धनगढ़ी खत्ता को तत्काल प्रभाव से राजस्व ग्राम घोषित किया जाए।

  2. तटबंध का निर्माण: कोसी नदी के कारण हो रहे भारी कटाव और बाढ़ से बस्तियों और खेतों की सुरक्षा के लिए मजबूत तटबंध (बाँध) का निर्माण किया जाए।

  3. सोलर फेंसिंग: जंगली जानवरों (हाथी, बाघ आदि) के आतंक से ग्रामीणों, मवेशियों और फसलों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में प्रभावी सोलर फेंसिंग और तार बाड़ की व्यवस्था की जाए।

  4. निर्बाध बिजली: क्षेत्र के सभी घरों और बसावटों को बिना किसी बाधा के बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

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सांसद अनिल बलूनी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीणों ने लोकसभा सांसद अनिल बलूनी पर सीधा और गंभीर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने गांव में आकर सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा इन बस्तियों को राजस्व ग्राम बनाने का बड़ा वादा किया था।

आज दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उनका एक भी वादा जमीन पर उतरकर पूरा नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी कि “यदि वे वन गांववासियों के साथ किए गए वादे को पूरा नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। हमें ऐसे झूठ बोलने वाले जनप्रतिनिधि नहीं चाहिए।”

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 वक्ताओं के तीखे तेवर: “अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता”

सभा को संबोधित करते हुए समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने हुए 25 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, जिसमें 10 वर्ष कांग्रेस और 15 वर्ष भाजपा ने शासन किया है। सभी ने वन ग्रामों को मूलभूत सुविधाएं और राजस्व ग्राम बनाने का वादा किया, परंतु किसी ने भी अपना वादा पूरा नहीं किया। उन्होंने आह्वान किया कि वन ग्रामों की जनता को अब भ्रष्ट राजनीतिक दलों का पिछलग्गू बनने के बजाय अपने संघर्षों को खुद मजबूत करना होगा। देश को आजादी वोट देने से नहीं बल्कि आंदोलनों से मिली थी।

दीपक जोशी ने कहा कि हम वन गांवों और खत्तों के निवासी जंगली जानवरों के आतंक के साए में बिना बिजली के अंधेरे में जीवन जी रहे हैं। कोसी नदी का बढ़ता जलस्तर हमारी खेती-किसानी और घरों को लील रहा है। अब हमें झूठे वादों में नहीं आना है।

ग्राम स्तरीय समिति के अध्यक्ष प्रेम राम ने कहा कि जब-जब संघर्ष हुआ है, तब-तब जीत हमारी हुई है। सभा को महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, ललिता रावत, किसान नेता ललित उप्रेती, महेश जोशी, व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, मनोनीत ग्राम प्रधान अंजलि रावत, कमला देवी, केशव आर्य, पूरन प्रधान, युवा कृष्णा, गणेश, मनमोहन और वीरू ने भी संबोधित किया। संचालन सूरज कुमार ने किया।

धरने में जगमोहन, योगेंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, गुड्डू भाई, हरीश, दिनेश, नन्दू किशोर, उत्तम चंद, उत्तम राम, खीमराम, मधुर देवी, अंजलि, दीपा, गीता, मोहिनी सहित सैकड़ों ग्रामीण और महिलाएं उपस्थित रहीं।


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