आईएमपीसीएल मोहान के निजीकरण और 46 एकड़ वन भूमि को निजी कंपनी को देने के खिलाफ उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी का विरोध प्रदर्शन
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आईएमपीसीएल मोहान का निजीकरण गैरकानूनी: उपपा का आरोप— प्राइवेट कंपनी को नहीं मिल सकती 46 एकड़ वन भूमि

अल्मोड़ा/मोहान: उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने आईएमपीसीएल (IMPCL) मोहान के निजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि निजीकरण की आड़ में आरक्षित वन भूमि (रिज़र्व फॉरेस्ट) को नियमों के विरुद्ध एक निजी कंपनी को हस्तांतरित किया जा रहा है। उन्होंने भारी मुनाफा कमाने वाली और प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सैकड़ों लोगों को आजीविका देने वाली इस महत्वपूर्ण सरकारी कंपनी के निजीकरण के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

आईएमपीसीएल मोहान के निजीकरण और 46 एकड़ वन भूमि को निजी कंपनी को देने के खिलाफ उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी का विरोध प्रदर्शन

उपपा अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 18 जनवरी 1977 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के उपसचिव चन्द्रहास सिंह द्वारा मुख्य अरण्यपाल (कुमाऊँ) को एक पत्र लिखा गया था। इस आदेश के तहत राज्य औद्योगिक विकास निगम (कानपुर) को औद्योगिक संस्थान की स्थापना के लिए चिलकिया रेंज के कुमेरिया ब्लॉक कम्पाट-1 में 46 एकड़ वन भूमि हस्तांतरित की गई थी। यह हस्तांतरण 3,000 रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष की दर से (कुल 1 लाख 38 हजार रुपये) में इस सख्त शर्त के साथ किया गया था कि यदि भूमि का उपयोग संबंधित औद्योगिक प्रयोजन के लिए नहीं हुआ, तो यह बिना किसी मुआवजे (प्रतिकर) के स्वतः वन विभाग को वापस मिल जाएगी।

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बाद में वर्ष 1993 में यह पूरा क्षेत्र प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) अल्मोड़ा के अधिकार क्षेत्र में आ गया, जहां वर्तमान में प्रसिद्ध आईएमपीसीएल फैक्ट्री स्थापित है। उपपा का कहना है कि अब जब सरकार द्वारा इस औद्योगिक भूमि और फैक्ट्री को ‘स्काईमैप’ नामक एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया है, तो यह मूल शर्तों का खुला उल्लंघन है। नियमों के मुताबिक आरक्षित वन विभाग की यह 46 एकड़ जमीन किसी भी कीमत पर किसी प्राइवेट कंपनी को नहीं दी जा सकती। ऐसी स्थिति में उपपा ने मांग की है कि उक्त बेशकीमती वन भूमि को तत्काल प्रभाव से वन विभाग को वापस सौंपा जाए।

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उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने कहा कि आईएमपीसीएल जैसी लाभ कमाने वाली सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में बेचना उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं और आम जनता के साथ एक बड़ा धोखा है। राज्य के संसाधनों को कॉर्पोरेट घरानों को सौंपने की इस नीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उपपा ने इसके खिलाफ हर स्तर पर एकजुट होकर पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया है।


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