रीठासाहिब में आफत की बारिश: लधिया-रतिया नदी के उफान में फंसे 70 सिख श्रद्धालु, SDRF ने सबको बचाया
लोहाघाट (चम्पावत): उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल रीठासाहिब में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रीठासाहिब जोड़ मेले के अंतिम दिन क्षेत्र में हुई अचानक मूसलाधार बारिश के चलते लधिया और रतिया नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया। जलस्तर बढ़ने से दोनों नदियों के पवित्र संगम पर स्नान कर रहे सैकड़ों सिख श्रद्धालुओं में अचानक अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते संगम क्षेत्र का पानी तेजी से फैल गया और नदी के इस तेज उफान के बीच 70 से अधिक सिख श्रद्धालु बीच धारा में फंस गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऐतिहासिक रीठासाहिब जोड़ मेले के समापन के खास अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु लधिया-रतिया संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे थे। इसी दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश शुरू होने से नदियों का बहाव खतरनाक स्तर पर आ गया। कई श्रद्धालु लहरों के बीच घिर गए, जिन्हें देखकर किनारे खड़े लोगों के सांसें अटक गईं।
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क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ने बताया कि नदियों में श्रद्धालुओं के फंसने की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय पुलिस और क्षेत्र के ग्रामीण तुरंत हरकत में आए। सभी ने मिलकर संयुक्त रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। उफनती नदी की तेज परवाह के बीच रेस्क्यू टीम के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कड़ी मशक्कत के बाद बीच धारा में फंसे सभी 70 से अधिक सिख श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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इसके अलावा, जलभराव के कारण पार्किंग क्षेत्र और नदी किनारे सजी अस्थायी दुकानों के आसपास फंसे अन्य लोगों को भी आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। रेस्क्यू टीमों ने समय रहते पार्किंग में खड़े वाहनों को भी सुरक्षित जगह शिफ्ट कराया, जिससे एक बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बच गया। इस सफल रेस्क्यू के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे बदलते मौसम को देखते हुए पूरी सतर्कता बरतें और उफनते नदी-नालों के किनारे जाने से बचें।





