Nainital_Consumer_Court: लालकुआँ बिजली विभाग की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा विधिक फैसला! ₹55 हजार का फर्जी बिल किया निरस्त, विभाग भरेगा ₹30,000 का हर्जाना! ⚖️👇
नैनीताल: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग नैनीताल ने विद्युत विभाग की मनमानी और लापरवाही के खिलाफ एक ऐतिहासिक विधिक निर्णय सुनाया है। माननीय आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल और सदस्य लक्ष्मण सिंह रावत की विधिक पीठ ने लालकुआँ विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) को तगड़ा झटका देते हुए विभाग द्वारा जारी किए गए मनमाने और भारी-भरकम बिजली बिलों को पूरी तरह से निरस्त (खण्डित) कर दिया है। इसके साथ ही उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना देने और सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) का दोषी पाते हुए बिजली विभाग पर ₹30,000 का विधिक हर्जाना और वाद व्यय भी ठोक दिया है।
यह विधिक परिवाद संख्या DC/51/CC/97/2023 के तहत लालकुआँ के बिंदुखत्ता (इन्द्रा नगर-2) क्षेत्र के एक उपभोक्ता द्वारा अपने विद्वान अधिवक्ता श्री जयबीर सिंह और श्री आदित्य कुमार के माध्यम से दिसंबर 2023 में दायर किया गया था। उपभोक्ता के घरेलू परिसर में 1 किलोवाट का संयोजन लगा हुआ है। उपभोक्ता का आरोप था कि मार्च 2023 में ₹9,924 का पूरा बिल विधिक रूप से जमा करने के बावजूद विभाग ने अप्रैल 2023 में अचानक ₹10,167 का फर्जी बकाया जोड़कर बिल भेज दिया। इसके बाद विभाग की मनमानी लगातार बढ़ती गई और जून 2023 में ₹18,748, फरवरी 2024 में ₹30,044 और सितंबर 2024 तक इस बिल को अवैध रूप से बढ़ाकर ₹55,179 कर दिया गया।
विधिक पैरवी: दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं ने आयोग में रखीं दलीलें
इस उपभोक्ता मामले में जिला आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से कानून के जानकारों ने विस्तृत विधिक बहस और साक्ष्य प्रस्तुत किए:
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परिवादी पक्ष की पैरवी: उपभोक्ता का पक्ष रखते हुए उनके विद्वान अधिवक्ता श्री जयबीर सिंह और श्री आदित्य कुमार ने अकाट्य विधिक तर्क दिए। उन्होंने कोर्ट के समक्ष पिछले वर्षों के बिजली बिलों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करते हुए साबित किया कि जब उपभोक्ता का औसत बिल ₹400 से ₹500 के बीच आता था, तो विभाग द्वारा अचानक हजारों रुपये का बिल थोप देना पूरी तरह विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण, दमनकारी और मानसिक उत्पीड़न करने वाला है।
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विपक्षी बिजली विभाग की पैरवी: वहीं दूसरी ओर, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता की तरफ से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री कैलाश चन्द, श्री मुकेश चन्द्र, श्री यशपाल आर्य और श्रीमती भारती आर्या ने विधिक मोर्चा संभाला। विभाग के वकीलों ने दलील दी कि उपभोक्ता का परिसर वन भूमि के अतिक्रमण क्षेत्र में है और उन्होंने नियमित बिल जमा नहीं किए, जिस कारण विलंब अधिभार (LPS) जुड़ने से यह विधिक राशि बढ़ी थी।
उपभोक्ता आयोग का विधिक निष्कर्ष और कड़ा आदेश
माननीय आयोग के अध्यक्ष श्री रमेश कुमार जायसवाल ने दोनों पक्षों की लिखित और मौखिक विधिक बहस सुनने के बाद बिजली विभाग के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि जब उपभोक्ता ने मार्च 2023 में ₹9,924 का सफल विधिक भुगतान कर दिया था, तो अगले ही महीने ₹10,167 का बिल आना प्रथम दृष्टया ही अत्यधिक संदिग्ध, असमान्य और घोर लापरवाही का प्रतीक है। विभाग यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि घरेलू कनेक्शन में इतनी भारी रीडिंग कैसे आई।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत विधिक अधिकारों का संरक्षण करते हुए आयोग ने निम्नलिखित ऐतिहासिक आदेश पारित किया:
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सभी मनमाने बिल निरस्त: विभाग द्वारा जारी ₹18,748, ₹30,044 और ₹55,179 के सभी पुराने विधिक बिलों को तत्काल प्रभाव से अपास्त एवं खण्डित किया जाता है।
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₹250 प्रति माह के आधार पर नया आगणन: बिजली विभाग को आदेशित किया जाता है कि वह 14 दिसंबर 2022 से आगे के बिलों का पुनर्मूल्यांकन अधिकतम ₹250 प्रति माह के विधिक औसत के आधार पर तय करे।
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जमा राशि का विधिक समायोजन: उपभोक्ता द्वारा पूर्व में जमा किए गए ₹9,924 और अंतरिम आदेश के तहत आंशिक रूप से जमा किए गए ₹20,000 को इस नए बिल में समायोजित (Adjust) किया जाए और यदि कोई अतिरिक्त राशि बचती है, तो विभाग उसे उपभोक्ता को वापस लौटाए।
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₹30,000 का भारी हर्जाना: मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के रूप में ₹20,000 और विधिक वाद व्यय के रूप में ₹10,000 की धनराशि बिजली विभाग उपभोक्ता को अलग से अदा करेगा।
माननीय आयोग ने बिजली विभाग को इस आदेश का अनुपालन करने के लिए 45 दिनों (डेढ़ माह) का विधिक समय दिया है। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर इस आदेश का विधिक पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 71 व 72 के तहत दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सीधे वसूली, कारावास (जेल) और कड़े अर्थदण्ड की दंडात्मक वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।





