देवभूमि जन हुंकार, नोएडा/सेक्टर-108 (11 अगस्त 2026): आज हम जिस 21वीं सदी के अत्याधुनिक दौर में सांस ले रहे हैं, वहां तकनीक, कॉर्पोरेट चकाचौंध और गगनचुंबी इमारतें तो ऊपर उठ रही हैं, लेकिन क्या हमारे पारिवारिक मूल्य, सहनशीलता और मानसिक जुड़ाव लगातार गर्त में जा रहे हैं? नोएडा के सेक्टर-108 स्थित डिवाइन मीडोज सोसाइटी में घटी एक दुखद घटना ने पूरे समाज को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है। यहां 16वीं मंजिल से गिरकर एक 24 वर्षीय नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
11 जुलाई को हुई थी शादी, 30 दिन में बिखर गई दुनिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका की पहचान 24 वर्षीय कामिनी कुमारी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से एटा (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली थी और पूर्व में एक बीपीओ में कार्य कर चुकी थी। कामिनी का विवाह महज एक महीने पहले 11 जुलाई को देहरादून निवासी मंथन धीमान से हुआ था। मंथन एक निजी कंपनी में वीडियो एडिटर के पद पर कार्यरत है। दोनों इस पॉश सोसाइटी के लिली टावर स्थित फ्लैट नंबर 1602 में किराए पर रहते थे।
बीते रविवार शाम करीब 5:30 बजे कामिनी अचानक 16वीं मंजिल की बालकनी से संदिग्ध परिस्थितियों में नीचे आ गिरी। भीषण आवाज सुनकर जब सोसाइटी के सुरक्षाकर्मी और पड़ोसी पहुंचे, तो कामिनी गंभीर अवस्था में पड़ी थी। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दहेज हत्या का आरोप बनाम डिप्रेशन का दावा
घटना की खबर मिलते ही एटा से नोएडा पहुंचे कामिनी के परिजनों ने पति मंथन और ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का संगीन आरोप लगाया है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यह कोई हादसा या अवसाद का मामला नहीं है, बल्कि शादी के तुरंत बाद से दहेज के लिए की जा रही प्रताड़ना का दर्दनाक परिणाम यानी दहेज हत्या है।
दूसरी ओर, पुलिस पूछताछ के दौरान पति मंथन ने दावा किया है कि कामिनी पिछले कुछ समय से गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थी और उसका चिकित्सकीय उपचार चल रहा था।
आधुनिक सोच, मानसिक दबाव और पुलिस जांच
थाना सेक्टर-39 के प्रभारी डीपी शुक्ला के अनुसार, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ टीम ने बालकनी व फ्लैट से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मायके पक्ष द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर दहेज प्रताड़ना व हत्या से संबंधित धाराओं में मामला पंजीकृत कर पड़ताल कर रही है।
संपादकीय दृष्टिकोण: बीपीओ में काम कर चुकी एक पढ़ी-लिखी आत्मनिर्भर युवती और वीडियो एडिटिंग जैसे आधुनिक पेशे में लगे एक युवक का महज 30 दिनों में इस भयानक मोड़ पर पहुंच जाना हमारी आधुनिक जीवनशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। क्या हाई-राइज सोसाइटी की ऊंची दीवारों के पीछे संवाद की कमी, भौतिकवादी अपेक्षाएं और धैर्य का अभाव हमारे रिश्तों को निगल रहा है? जब तक हम अत्याधुनिक बनने के साथ-साथ नैतिक और मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होंगे, ऐसे कड़वे हादसे समाज को झकझोरते रहेंगे।
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