देवभूमि जन हुंकार, रामनगर / नैनीताल: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा और छात्रराजनीति के गलियारों में इन दिनों टिकट वितरण को लेकर भूचाल आया हुआ है। हल्द्वानी के बाद अब कुमाऊं मण्डल के एक अन्य प्रमुख केंद्र— रामनगर स्नातकोत्तर महाविद्यालय (Ramnagar PG College) में छात्रसंघ चुनाव से ठीक पहले सत्तारूढ़ विचारधारा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को एक बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है। संगठन द्वारा अध्यक्ष पद के लिए विशाखा चौहान को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद छात्र नेता नीरज कंडारी के समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, रामनगर पीजी कॉलेज में होने वाले छात्रसंघ चुनावों को लेकर एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए विशाखा चौहान के नाम की घोषणा की। इस घोषणा के सामने आते ही संगठन के भीतर बरसों से सुलग रहा असंतोष अचानक एक बड़े विस्फोट में बदल गया।
घोषणा से वंचित रहे और अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे छात्र नेता नीरज कंडारी के समर्थकों और शुभचिंतकों में भारी आक्रोश फैल गया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि नीरज कंडारी ने लंबे समय से कॉलेज परिसर में संगठन की जड़ों को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत की है, लेकिन नेतृत्व ने उनकी निष्ठा और संघर्ष की अनदेखी कर दी।
परिणामस्वरूप, विरोध दर्ज कराते हुए ABVP के अनेकों सक्रिय कार्यकर्ताओं ने आज सामूहिक रूप से संगठन की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफा देने वाले बागी कार्यकर्ताओं ने खुलकर आरोप लगाया कि नीरज कंडारी ने वर्षों तक संगठन के लिए पूरी तरह निस्वार्थ भाव से काम किया है और हर छात्र हित के संघर्ष व आंदोलनों में सबसे आगे रहे हैं। ऐसे जमीनी और समर्पित कार्यकर्ता को नजरअंदाज कर संगठन ने सीधे तौर पर छात्र हितों का हनन किया है।
बागी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दो-टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि वे संगठन के इस पक्षपातपूर्ण रवैये को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब वे नीरज कंडारी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे और कॉलेज परिसर में छात्र हितों की असली लड़ाई लड़ेंगे।
इस अचानक हुई बगावत और सामूहिक इस्तीफों के बाद रामनगर पीजी कॉलेज का छात्रसंघ चुनाव अब बेहद रोमांचक, अप्रत्याशित और कांटे का मुकाबला बनता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एबीवीपी के कैडर वोटों में हुई इस बड़ी दोफाड़ का सीधा और रणनीतिक फायदा मैदान में उतरे अन्य छात्र संगठनों को मिल सकता है। बहरहाल, रामनगर के इस चुनावी अखाड़े में यह बगावत किस करवट बैठेगी, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन इसने छात्रराजनीति के पारे को और अधिक बढ़ा दिया है।
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