देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी / रानीबाग / देहरादून: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अंतर्गत रानीबाग क्षेत्र में धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर घमासान मच गया है। रानीबाग स्थित ऐतिहासिक चित्रशिला धाम – माता जिया रानी मंदिर परिसर में कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसके विरोध में पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड द्वारा मंदिर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए 1 अक्टूबर से शुरू किया गया जन हस्ताक्षर अभियान आज अपने 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है।
संगठन का मुख्य आरोप है कि कत्यूरी वंश की महान आराध्य देवी माता जिया रानी की तपोभूमि और पवित्र चित्रशिला धाम में शनि मंदिर के नाम पर स्थायी ढांचा खड़ा किया जा रहा है। इसके जरिए मंदिर के आंगन और परंपरागत मेले की भूमि को तेजी से घेरा जा रहा है।
पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस अतिक्रमण के कारण जिया रानी की गुफा से होने वाले पवित्र शिला के दर्शन पूरी तरह बाधित हो रहे हैं। इसके साथ ही गार्गी नदी तट पर स्थित घाघरा नुमा चित्रशिला की ऐतिहासिक मान्यता के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि स्पष्ट रूप से माता जिया रानी और चित्रेश्वर महाराज चित्राशिला घाट के नाम पर दर्ज है, ऐसे में एक निजी व्यक्ति द्वारा इसका व्यावसायीकरण किया जाना अत्यंत आपत्तिजनक है।
विवाद उस समय और अधिक उग्र हो गया जब 29 अगस्त को कत्यूरी पहाड़ी समाज ने रानीबाग में इस कथित अतिक्रमण के खिलाफ एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया था। आरोप है कि महापंचायत के बाद जब लोग मंदिर दर्शन के लिए गए, तो अतिक्रमणकारी हेमंत कुमार गुप्ता ने दर्शन करने वालों पर अचानक हमला कर दिया और भारी धारदार डेक के ढक्कन फेंके गए।
जब कत्यूरी समाज के लोगों ने इस हमले का विरोध किया, तो इसके विपरीत हेमंत गुप्ता की शिकायत पर समाज के 49 लोगों के खिलाफ गंभीर मुकदमे दर्ज करा दिए गए। पहाड़ी आर्मी के अध्यक्ष हरीश रावत समेत आधे दर्जन लोगों को हिरासत में भी लिया गया। संगठन का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव के तहत की गई है, और इसकी उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हरीश रावत ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पौराणिक चित्रेश्वर महादेव मंदिर रानीबाग के परिसर में बिना किसी वैध अनुमति के बनाए गए शनि मंदिर में दो और तीन मंजिला कमरे तथा टीन शेड खड़े कर दिए गए हैं, जिससे इस स्थान की पौराणिकता लगभग समाप्त हो गई है। यह ढांचा मंदिर की दो-तिहाई भूमि को पूरी तरह घेर चुका है।
उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में ही कत्यूरी समाज के प्रतिनिधियों ने रानीबाग के राजस्व निरीक्षक और विकास प्राधिकरण हल्द्वानी-नैनीताल को इस अवैध निर्माण की लिखित सूचना दी थी। प्राधिकरण ने वाद संख्या UCMS/NDA/R/0873/2025 के तहत इसका संज्ञान लेते हुए 12 अगस्त 2025 और फिर 10 नवंबर 2025 को इस ढांचे को हटाने के स्पष्ट आदेश दिए थे, लेकिन अतिक्रमणकारी द्वारा इन तमाम प्रशासनिक आदेशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर निर्माण कार्य लगातार जारी रखा गया।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे सनातन परंपरा के देवता शनिदेव के विरोधी बिल्कुल नहीं हैं। सनातन परंपरा में शनि एक ग्रह हैं जिनका न्याय के देवता के रूप में पूजन होता है, किंतु पौराणिक शिव की इस पावन भूमि पर यह वाणिज्यिक ढांचा सनातन धर्म की मूल मान्यताओं के विपरीत है।
पहाड़ी आर्मी ने मांग की है कि मौके का तत्काल सीमांकन कराकर राजस्व अभिलेख और अनुमति की स्थिति को सार्वजनिक किया जाए, तथा इस अवैध ढांचे को जमींदोज किया जाए। इसके साथ ही, अतिक्रमणकारी हेमंत कुमार गुप्ता पर पौराणिक मंदिर को खंडित करने, धार्मिक भावनाएं आहत करने, जानलेवा हमला करने और अतिक्रमण करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।
अंत में हरीश रावत ने चेतावनी दी है कि चूंकि अभी समाज के कई हिस्सों को इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए संगठन एक ‘राज्य जागरूकता भ्रमण’ कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसके पश्चात पहाड़ की जनता को एकजुट करके एक बड़ा ‘रानीबाग कूच’ कार्यक्रम किया जाएगा, और शक्तिशाली कत्यूरी राजवंश की इस ऐतिहासिक भूमि से हर हाल में अवैध कब्जा हटाकर दम लिया जाएगा।



