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उत्तराखंड शिक्षा विभाग का महा-आदेश: अटैच शिक्षकों और कर्मचारियों का संबद्धीकरण तत्काल निरस्त; मूल तैनाती पर न लौटने वालों का जून से रुकेगा वेतन, महानिदेशालय सख्त! 👇

देहरादून: उत्तराखंड शिक्षा विभाग से इस समय की सबसे बड़ी और प्रशासनिक फेरबदल की विधिक खबर सामने आ रही है। प्रदेश में लंबे समय से मलाईदार पदों या सुगम क्षेत्रों में ‘अटैचमेंट’ (संबद्धीकरण) के सहारे जमे शिक्षकों और कर्मचारियों पर महानिदेशालय ने विधिक हंटर चला दिया है। महानिदेशालय द्वारा जारी बेहद कड़े और स्पष्ट विधिक निर्देशों के तहत, राज्य के विभिन्न कार्यालयों और स्कूलों में किए गए सभी प्रकार के संबद्धीकरण (Attachment) को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के इस ऐतिहासिक फैसले को प्रदेशभर में अटैच शिक्षकों की ‘घर वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित होगी और बुनियादी शिक्षण व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी।

महानिदेशालय द्वारा जारी विधिक गाइडलाइंस के अनुसार, इस आदेश से केवल उन्हीं कार्मिकों को छूट दी गई है जो ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ में तैनात हैं, अथवा जिन विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य (Zero Student Enrollment) होने के कारण शिक्षकों को विधिक रूप से अन्यत्र संबद्ध किया गया था। इन दो अपवादों को छोड़कर, शेष सभी संवर्गों के शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों का अटैचमेंट विधिक रूप से शून्य घोषित कर दिया गया है।

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 ‘नो जॉइनिंग, नो सैलरी’: जून 2026 की सैलरी के लिए मूल कार्यस्थल पर हाजिरी अनिवार्य!

शिक्षा विभाग ने आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए वित्तीय चाबुक भी चलाया है। विभाग द्वारा साफ कर दिया गया है कि जून 2026 और उसके आगामी महीनों का मासिक वेतन केवल और केवल उन्हीं शिक्षकों एवं कार्मिकों को विधिक रूप से आहरित (रिलीज़) किया जाएगा, जिन्होंने अपने मूल विद्यालय या कार्यालय में जाकर विधिवत कार्यभार (जॉइनिंग) ग्रहण कर लिया होगा। यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी अपने मूल कार्यस्थल पर बिना विधिक अनुमति के अनुपस्थित पाया जाता है या जॉइनिंग नहीं करता है, तो उसका वेतन तत्काल रोक दिया जाएगा।

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📊 आंकड़ों की बाजीगरी खत्म; अब मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) स्तर पर होगा विधिक सत्यापन

महानिदेशालय ने प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है। अब तक मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO), जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) और जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) कार्यालयों से अलग-अलग स्तर पर अटैचमेंट की सूचनाएं भेजी जा रही थीं, जिससे डेटा और आंकड़ों में भारी भिन्नता व गड़बड़ी सामने आ रही थी।

इस विधिक विसंगति को दूर करने के लिए अब यह नियम बनाया गया है कि सभी जनपदों के संबद्ध शिक्षकों और कर्मचारियों का पूरा विवरण केवल मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) स्तर पर ही संकलित, विश्लेषित और विधिक रूप से सत्यापित (Verify) किया जाएगा।

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⏱️ रोजाना शाम 4 बजे तक देनी होगी संवर्गवार रिपोर्ट

महानिदेशालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रारूप-1, प्रारूप-2 और प्रारूप-3 में संवर्गवार (Category-wise) पूरी विधिक जानकारी प्रतिदिन अपराह्न 4:00 बजे तक महानिदेशालय को अनिवार्य रूप से ई-मेल अथवा व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराएंगे। विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि शासन के इन विधिक आदेशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई या लापरवाही अक्षम्य मानी जाएगी और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी वैधानिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


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