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उत्तराखंड ने खोया एक अनमोल रत्न: पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने दी ‘पन्दा’ को भावभीनी श्रद्धांजलि; बताया अपूर्णीय क्षति 👇

रामनगर/नैनीताल: उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी योद्धा, वन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी नेता और सामाजिक गतिविधियों में सदैव सक्रिय रहने वाले पान सिंह नेगी जी (जिन्हें प्यार और सम्मान से सभी ‘पन्दा’ कहते थे) का आकस्मिक निधन हो गया है। उनके दिवंगत होने की अत्यंत दुखद और हृदयविदारक खबर रामनगर के वरिष्ठ साथी इन्द्र मनराल जी द्वारा प्राप्त हुई है। पन्दा के निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों, कर्मचारी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरे शोक की लहर दौड़ गई है।

उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने अपने बेहद करीबी और घनिष्ठ मित्र पान सिंह नेगी (पन्दा) के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। पूर्व विधायक जंतवाल ने कहा कि यह समाचार हम सबको व्यथित करने वाला है और समाज के लिए एक दोहरा आघात है। पन्दा के जाने से उत्तराखंड ने अपना एक बेहद जागरूक, समर्पित और सक्रिय साथी खो दिया है, जिसकी कमी हमेशा अखरेगी।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन और कर्मचारी समुदाय को संगठित करने में रहा अभूर्व योगदान: नारायण सिंह जंतवाल

पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने पन्दा के योगदान को याद करते हुए कहा कि वन निगम में अपनी सेवा के दौरान उन्होंने नैनीताल में एक लंबा और ऐतिहासिक समय गुजारा था। वे कर्मचारी संगठनों में एक विशिष्ट और अत्यंत सम्मानित स्थान रखते थे।

पन्दा का पूरा जीवन समाज और उत्तराखंड राज्य के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित रहा। राज्य आंदोलन के दौर में कर्मचारी समुदाय को एकजुट और संगठित करने में उन्होंने सदैव पूर्ण मनोयोग के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी अद्भुत संगठनात्मक क्षमता का ही परिणाम था कि कर्मचारी समुदाय ने राज्य आंदोलन में एक जबरदस्त और ऐतिहासिक योगदान दिया।

पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने बताया कि पन्दा हमेशा उनके चुनावों में अग्रणीय भूमिका निभाते थे और सदैव पूर्ण मनोयोग से उनकी हौसला अफजाई करते थे। वे एक ऐसे घनिष्ठ मित्र थे जो सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के साथ-साथ दल को मजबूत करने और जनसेवा के कार्यों में अपना पूरा योगदान देने के लिए प्रेरित करते थे।

2 अक्टूबर 1994 की दिल्ली रैली और खूर्पाताल का वह अंतिम विधिक मिलन…

पुरानी यादों को साझा करते हुए पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने बताया कि 02 अक्टूबर 1994 को जब उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए दिल्ली में ऐतिहासिक महारैली आयोजित की गई थी, तब पन्दा नैनीताल से अन्य तमाम साथियों को साथ लेकर दिल्ली गए थे। दिल्ली पहुंचने पर वे सभी साथियों को अपनी ही रिश्तेदारी में लेकर गए, जहां सभी ने नाश्ता किया और फिर दिल्ली के कई अन्य साथियों को साथ जोड़कर पूरी सक्रियता के साथ रैली में शामिल हुए थे।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अभी कुछ महीने पहले ही खूर्पाताल में राज्य आंदोलनकारियों का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसकी पहल गणेश सिंह जी और पान सिंह सिजवाली जी ने की थी। उस कार्यक्रम में पन्दा पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए थे, जहां उनका स्वास्थ्य भी बिल्कुल ठीक था और साथियों के साथ उनकी राज्य के विकास को लेकर लंबी बातचीत हुई थी। किसी ने नहीं सोचा था कि खूर्पाताल का वह मिलन उनके साथ अंतिम विधिक मिलन साबित होगा।

पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल और क्षेत्र के समस्त गणमान्य साथियों की ओर से पुण्यात्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की है कि परमात्मा दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों, मित्रों व साथियों को इस अत्यंत कठिन समय में सम्बल प्रदान करें।


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