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उत्तराखंड के सभी सरकारी व निजी स्कूलों के लिए नया टाइम-टेबल जारी: शासन ने बदला प्रार्थना सभा और पीरियड्स का समय; देखें ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन समय-सारिणी! 👇

देहरादून: उत्तराखंड शासन ने राज्य के शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक बड़ा और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। सचिव (विद्यालयी शिक्षा) रविनाथ रामन द्वारा जारी नए शासनादेश के अनुसार, प्रदेश के समस्त राजकीय (सरकारी) एवं निजी (प्राइवेट) माध्यमिक व प्रारम्भिक विद्यालयों के लिए एक समान नया समय-सारिणी (Time-Table) निर्धारित कर दिया गया है. शासन द्वारा पूर्व में जारी आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए अब ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन सत्र के लिए अलग-अलग विस्तृत विधिक समय तय किया गया है.

इस नए नियम के तहत सभी स्कूलों में प्रार्थना सभा से लेकर मध्यान्तर (लंच) और सभी 8 वादनों (पीरियड्स) की समय-सीमा तय कर दी गई है.

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ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी (01 अप्रैल से 30 सितम्बर तक):

गर्मियों के मौसम के लिए विद्यालय संचालन का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:

  • प्रार्थना सभा: प्रातः 07:15 से 07:30 बजे तक (15 मिनट)

  • वादन 1 से 4 (शुरुआती पीरियड्स): प्रातः 07:30 से 10:10 बजे तक (प्रत्येक पीरियड 40 मिनट)

  • मध्यान्तर (इंटरवल): प्रातः 10:10 से 10:40 बजे तक (30 मिनट)

  • वादन 5 से 8 (अंतिम पीरियड्स): प्रातः 10:40 से दोपहर 01:00 बजे तक (प्रत्येक पीरियड 35 मिनट)

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शीतकालीन समय-सारिणी (01 अक्टूबर से 31 मार्च तक):

सर्दियों के मौसम में कोहरे और ठंड को देखते हुए स्कूल देरी से खुलेंगे:

  • प्रार्थना सभा: प्रातः 08:45 से 09:00 बजे तक (15 मिनट)

  • वादन 1 से 4 (शुरुआती पीरियड्स): प्रातः 09:00 से दोपहर 12:00 बजे तक (प्रत्येक पीरियड 45 मिनट)

  • मध्यान्तर (इंटरवल): दोपहर 12:00 से 12:30 बजे तक (30 मिनट)

  • वादन 5 से 8 (अंतिम पीरियड्स): दोपहर 12:30 से अपराह्न 03:10 बजे तक (प्रत्येक पीरियड 40 मिनट)

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भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव के लिए बनेगी विशेष समिति

शासनेदश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड के कई पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक बर्फबारी या कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होती हैं। यदि किसी विद्यालय को इस समय-सारिणी में कोई विधिक संशोधन कराना हो, तो प्रधानाचार्य के प्रस्ताव पर एक विशेष समिति परीक्षण करेगी। इस पाँच सदस्यीय जिला स्तरीय समिति का ढांचा इस प्रकार होगा:

  1. अध्यक्ष: सम्बंधित जिले के जिलाधिकारी (DM) अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि (जैसे उपजिलाधिकारी/खण्ड विकास अधिकारी)।

  2. सदस्य: सम्बंधित जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO)।

  3. सदस्य: सम्बंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक/प्रारम्भिक)।

  4. सदस्य: सम्बंधित खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO)।

  5. सदस्य: सम्बंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या/प्रधान अध्यापक।

कड़ी शर्त: यह समिति यदि किसी स्कूल के स्थानीय समय में आंशिक संशोधन की संस्तुति देती भी है, तो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा कि किसी भी दशा में निर्धारित कुल शिक्षण अवधि (पढ़ाई के घंटों) में कोई कमी न की जाए।


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