Uttarakhand Administration And Health Department Concept Representing Jyolikot Waterborne Disease Inspectionनैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में जल जनित रोगों के प्रकोप पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण की बैठक।
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देवभूमि जन हुंकार, नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के अंतर्गत आने वाले ज्योलीकोट क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से फैल रहे जल जनित रोगों (Waterborne Diseases) के प्रकोप को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अरविन्द कुमार पाण्डे ने सोमवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट सहित गाजा, सरियाताल, छीड़ा और बेलवाखान क्षेत्र का तूफानी दौरा किया और व्यवस्थाओं की खुद मॉनिटरिंग की।

अस्पताल और प्रभावित गांवों का औचक निरीक्षण

मुख्य विकास अधिकारी ने अपने इस स्थलीय निरीक्षण के दौरान सबसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट पहुंचकर वहां भर्ती मरीजों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। इसके बाद वे सीधे प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों—गाजा, सरियाताल और छीड़ा पहुंचे, जहाँ उन्होंने जमीनी हकीकत का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने बीरभट्टी स्थित सीवरेज लाइन के चैंबर से हो रही लीकेज का भी स्थलीय मुआयना किया और जल संस्थान को तुरंत इसकी मरम्मत व शिफ्टिंग का कार्य पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।

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स्वास्थ्य विभाग को घर-घर सैंपलिंग और मुफ्त इलाज के आदेश

स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि:

  • क्षेत्र में नियमित रूप से प्रत्येक घर में जाकर डोर-टू-डोर ब्लड सैंपलिंग और वायरस सैंपलिंग की जाए।

  • ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए लगातार स्वास्थ्य शिविर (Medical Camps) लगाए जाएं।

  • मेडिकल टीमें एम्बुलेंस के साथ क्षेत्र में लगातार तैनात रहें और बीमार लोगों के घर जाकर उनकी नियमित देखरेख व दवा उपलब्ध कराएं।

  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) यह सुनिश्चित करें कि क्षेत्र के प्रत्येक जनप्रतिनिधि को आयुष्मान योजना के अंतर्गत अनुबंधित चिकित्सालयों की सूची उपलब्ध हो, ताकि बीमार व्यक्ति का त्वरित और निःशुल्क उपचार हो सके।

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दूषित जल स्रोतों को सील करने के कड़े निर्देश

पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीडीओ ने जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई और निर्देश दिए कि:

  • प्रत्येक जल स्रोत के नियमित सैंपल लिए जाएं और नियमित क्लोरिनेशन सुनिश्चित किया जाए।

  • पिछले 3 महीनों में पेयजल टैंकों और स्रोतों से लिए गए सभी सैंपलों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

  • सीडीओ ने दो-टूक कहा कि पेयजल सैंपलिंग में जो भी जल स्रोत दूषित पाए जाएं, उन्हें तहसीलदार नैनीताल द्वारा तत्काल प्रभाव से सील किया जाए। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना जल संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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 जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट, लापरवाही पर गिरेगी गाज

मुख्य विकास अधिकारी ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि यदि किसी भी व्यक्ति में बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला प्रशासन को इसकी सूचना दें।

उन्होंने अंत में अवगत कराया कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी महोदय को उपलब्ध कराई जाएगी, और जांच में जिस भी स्तर पर लापरवाही या कोताही पाई जाएगी, संबंधित के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इस दौरान क्षेत्र प्रमुख भीमताल डॉ. हरीश बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य हिमांशु पांडे, ग्राम प्रधान डॉ. बबीता मनराल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत, परियोजना निदेशक शिल्पी पंत, जिला विकास अधिकारी संतोष कुमार पंत, अधीक्षण अभियंता पेयजल निगम अशोक कटारिया, अधिशासी अभियंता जल संस्थान मनीष पिल्लई, तहसीलदार अक्षय भट्ट सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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