देवभूमि जन हुंकार, हल्द्वानी (नैनीताल): दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हॉस्टल हादसे और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी में भी युवाओं और सामाजिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। आज 9 सितंबर 2026 को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन और दिल्ली नगर निगम (MCD) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला दहन किया गया। इसके पश्चात राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी के माध्यम से प्रेषित किया गया। यह पूरा उग्र प्रदर्शन परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के आह्वान पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने याद दिलाया कि विगत 6 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के पास सत्य निकेतन क्षेत्र में एक निजी छात्रावास की पांच मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई थी, जिसमें छह छात्रों और एक आम नागरिक की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल छात्र अभी भी उपचाराधीन हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग 7 लाख छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं, जिनमें से आधे से अधिक अन्य राज्यों से यहां पढ़ने आते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन बाहरी छात्रों के रहने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के पास अपने छात्रावासों में मात्र 7,000 से 8,000 छात्रों के लिए ही व्यवस्था है। ऐसी लाचारी के कारण छात्र महंगे दामों पर असुरक्षित और खस्ताहाल निजी छात्रावासों या पीजी (PG) में रहने को मजबूर हैं।
पूर्व में छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी प्रशासन से लगातार हॉस्टल की मांग उठाए जाने के बावजूद इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके अलावा दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार द्वारा कभी भी इन हॉस्टल बिल्डिंगों का कोई नियमित निरीक्षण नहीं किया गया, या फिर निरीक्षण के बावजूद खस्ताहाल बिल्डिंगों को धड़ल्ले से चलने दिया गया। वक्ताओं ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था द्वारा की गई संस्थागत हत्या है, जिसके लिए डीयू प्रशासन, MCD और दिल्ली सरकार पूरी तरह जिम्मेदार हैं।
प्रदर्शन के दौरान डीयू के दक्षिणी परिसर में हुई एक अन्य अमानवीय घटना का भी पुरजोर विरोध किया गया। डीयू में रंजीत कुमार गौतम नाम के 34 वर्षीय युवक को ठेके के तहत माली के तौर पर कार्य करने के लिए रखा गया था, लेकिन उनसे जबरन इलेक्ट्रिशियन का खतरनाक काम भी करवाया जा रहा था।
गत 7 सितंबर को कार्य करने के दौरान करंट लगने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। वक्ताओं ने कहा कि यह घटना साफ साबित करती है कि सरकारी और अर्ध-सरकारी क्षेत्रों में भी ठेके पर मजदूरों को रखकर उनसे उनकी योग्यता के विपरीत जोखिम भरे काम करवाए जा रहे हैं और उनकी जिंदगी को दांव पर लगाया जा रहा है। इसी प्रशासनिक लापरवाही के कारण रंजीत कुमार गौतम की जान गई है।
बुद्ध पार्क में आयोजित सभा और पुतला दहन के बाद राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गईं:
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दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
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दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश भर के सभी विश्वविद्यालयों में छात्रों के लिए छात्रावासों का समुचित और पर्याप्त इंतजाम किया जाए।
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सत्य निकेतन की इस भीषण दुर्घटना में मारे गए सभी छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए।
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दिल्ली सहित देश के सभी विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित हॉस्टलों और पीजी का अनिवार्य रूप से उच्चस्तरीय निरीक्षण किया जाए।
इस विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के साथ-साथ भीम आर्मी, मूल निवासी संघ, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, भाकपा-माले, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, सामाजिक न्याय मंच और अम्बेडकर मिशन के कार्यकर्ता मुख्य रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम में महेश, रजनी, आर.पी. गंगोला, ऋतु, मुकेश भंडारी, बी.एल. आर्य, चंदन, कैलाश, एडवोकेट अंजू, विनोद, अनिशेख, सुरेंद्र, नफीस अहमद, प्रवीण कुमार, गोपाल गवासिकोटी, दयाल राम, जी.आर. टम्टा और आकाश भारती सहित बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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