मोतीनगर में स्टोन क्रशर द्वारा नहर और रास्ता रोकने के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन
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हल्द्वानी: स्टोन क्रशर के रसूख के आगे बेबस प्रशासन? सरकारी नहर और रास्ता रोकने पर भड़के ग्रामीण, बड़े आंदोलन की चेतावनी

मोतीनगर (हल्द्वानी): क्षेत्र के मोतीनगर स्थित ‘हिमालया स्टोन क्रशर’ और ‘हिमालया ग्रिड’ पर सरकारी नहर और पुराने रास्ते को अवैध रूप से अवरुद्ध करने के गंभीर आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। मंगलवार को प्रशासनिक सर्वे के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन रसूखदारों के दबाव में काम कर रहा है और गरीब बस्तीवासियों को निशाना बनाया जा रहा है।

नहर के बीच में खड़ी कर दी दीवार, सिंचाई संकट गहराया

ग्रामीणों का कहना है कि अंग्रेजों के समय से संचालित काठगोदाम-लालकुआं फीडर की महत्वपूर्ण सिंचाई नहर को स्टोन क्रशर प्रबंधन ने दीवार खड़ी कर रोक दिया है। आरोप है कि सरकारी भूमि और पुरानी आंतरिक सड़क पर भी अवैध कब्जा कर रास्ता बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जहाँ एक ओर गरीबों को उजाड़ने के लिए तत्काल नोटिस थमाए जा रहे हैं, वहीं रसूखदारों द्वारा किए गए इस बड़े अतिक्रमण पर प्रशासन मौन क्यों है?

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SDM की मौजूदगी में गायब रहा क्रशर प्रबंधन, बढ़ा आक्रोश

मामले के निराकरण के लिए एसडीएम रेखा कोहली भारी प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं, लेकिन इस दौरान स्टोन क्रशर प्रबंधन का कोई भी प्रतिनिधि मौके पर मौजूद नहीं रहा। ग्रामीणों ने इसे प्रशासन की मिलीभगत और प्रभावशाली पक्ष को मिलने वाला संरक्षण करार दिया।

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ग्राम प्रधान पदमपुर देवलिया रमेश जोशी का कहना है की  “प्रशासन को निष्पक्ष होना चाहिए। गरीबों के घर तोड़ने में जल्दबाजी दिखाई जा रही है, लेकिन सरकारी नहर और रास्ते पर हुए कब्जे को हटाने में प्रशासन के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं?”वही  बहादुर सिंह जंगी (वरिष्ठ माले नेता): “यह केवल रास्ते का मामला नहीं, बल्कि सत्ता और रसूख के दम पर जनता के अधिकार कुचलने की कोशिश है। यदि जल्द नहर और रास्ता नहीं खुला, तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।”नंदन पड़ालनी (समाजसेवी): “बरसात का मौसम नजदीक है। नहर बाधित होने से पानी आबादी की ओर फैलेगा, जिससे मोतीनगर क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।” ने गंभीर प्रतिक्रियाएं दी है।

“गरीब बनाम रसूखदार” की जंग

क्षेत्रवासियों ने साफ कर दिया है कि वे सरकारी जमीन और जनसुविधाओं पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ‘दोहरा मापदंड’ अपना रहा है। अब यह विवाद स्थानीय समस्या से बढ़कर एक बड़ी कानूनी और सामाजिक लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल दीवार हटाकर रास्ता बहाल नहीं किया गया, तो प्रशासन को बड़े जन-आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।


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