बागेश्वर के राजकीय महाविद्यालय काण्डा को जोड़ने वाली जर्जर व गड्ढों से भरी 800 मीटर लंबी बदहाल सड़क
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काण्डा में विकास के दावों की खुली पोल: राजकीय महाविद्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बदहाल, सालों से नहीं हुआ डामरीकरण! 👇

काण्डा (बागेश्वर):उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा और बुनियादी विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच बागेश्वर जनपद के काण्डा से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ राजकीय महाविद्यालय काण्डा को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली एकमात्र 800 मीटर की संपर्क सड़क पिछले लंबे समय से अत्यंत जर्जर और बदहाल स्थिति में आंसू बहा रही है। इस सड़क की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिसके चलते कॉलेज आने-जाने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और स्थानीय ग्रामीणों का जीवन हर समय विधिक रूप से खतरे में बना रहता है।

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निर्माण के बाद से आज तक नहीं नसीब हुआ डामरीकरण, हादसों को दावत

स्थानीय नागरिकों और महाविद्यालय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब से इस 800 मीटर लंबी विधिक सड़क का निर्माण हुआ है, तब से लेकर आज तक इस पर कभी भी डामरीकरण (Hot Mix) का कार्य नहीं किया गया। वर्तमान में वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही इस बदहाल सड़क पर पहाड़ियों से बड़े-बड़े पत्थरों के गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है। जगह-जगह गहरे गड्ढे बन जाने के कारण पूरी सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है, जिससे छात्र-छात्राओं और राहगीरों के लिए इस मार्ग से आवागमन करना अत्यंत असुरक्षित और जानलेवा साबित हो रहा है।

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जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के आश्वासन निकले खोखले, जनता में आक्रोश

इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के विधिक निर्माण को लेकर महाविद्यालय प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा शासन-प्रशासन से लेकर क्षेत्रीय माननीय विधायक महोदय तक कई बार लिखित और मौखिक रूप से गुहार लगाई जा चुकी है। हर बार ग्रामीणों को जल्द ही विधिक बजट स्वीकृत कराकर सड़क चकाचक करने का केवल खोखला आश्वासन ही मिला, लेकिन वर्तमान तक धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

अनेकों आश्वासनों के बाद भी सड़क का निर्माण न होना प्रशासनिक शिथिलता को साफ दर्शाता है। महाविद्यालय के मुख्य मार्ग की इस प्रकार लगातार अनदेखी करना भविष्य में किसी बड़ी और अप्रिय दुर्घटना का कारण बन सकता है, जिससे जनहानि की पूरी आशंका बनी हुई है।

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त्वरित विधिक संज्ञान ले जिला प्रशासन: ग्रामीणों की मांग

क्षेत्रीय जनता, छात्र संघ और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन व संबंधित कार्यदायी संस्था से पुरजोर मांग की है कि इस गंभीर विधिक व लोकहित के मामले को ठंडे बस्ते में न डाला जाए। भविष्य की किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला मजिस्ट्रेट को तुरंत इस पर त्वरित वैधानिक व सुधारात्मक कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क के डामरीकरण और सुदृढ़ीकरण की विधिक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

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