कालाढूंगी में यूकेडी का महा-शक्ति प्रदर्शन: पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष तारा सिंह नेगी समर्थकों संग उक्रांद में शामिल, हजारों लोगों ने ली सदस्यता 👇
हल्द्वानी (कालाढूंगी): उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में रविवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला। कालाढूंगी के रामलीला मैदान में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) द्वारा आयोजित विशाल जनसभा में दल ने अपना महा-शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष तारा सिंह नेगी ने राष्ट्रीय दलों को बड़ा झटका देते हुए अपने दर्जनों प्रमुख समर्थकों के साथ उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) का दामन थाम लिया। यूकेडी की नीतियों और पहाड़ के प्रति समर्पण से प्रभावित होकर क्षेत्र के हजारों स्थानीय युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने एक साथ दल की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की, जिससे पूरा रामलीला मैदान खचाखच भर गया और चारों तरफ उक्रांद के झंडे लहराते नजर आए।
‘गैरसैंण का नाम सुनते ही भाजपा-कांग्रेस को आ जाता है बुखार’
जनसभा में उमड़े भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए यूकेडी के शीर्ष नेता और वरिष्ठ राजनेता काशी सिंह ऐरी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को सूबे की स्थाई राजधानी बनाने के नाम पर दोनों ही दलों को बुखार आ जाता है। इन पार्टियों को हमेशा यह डर सताता रहता है कि यदि पहाड़ों में स्थाई राजधानी बनाई गई, तो तराई क्षेत्र के उधम सिंह नगर और हरिद्वार जिले के लोग नाराज हो जाएंगे। इसी राजनैतिक नफा-नुकसान का नतीजा है कि राज्य गठन के 26 साल बाद भी उत्तराखंड को अपनी स्थाई राजधानी नहीं मिल सकी है।
’26 साल में बने 13 मुख्यमंत्री, सब दिल्ली के मुंशी’
काशी सिंह ऐरी ने मौजूदा और पूर्ववर्ती सरकारों पर प्रहार करते हुए कहा कि 26 वर्ष के इस राज्य में अब तक 13 लोग मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, लेकिन ये इस प्रदेश के सच्चे मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि दिल्ली में बैठे अपने आलाकमान के ‘मुंशी’ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनका काम सिर्फ उत्तराखंड राज्य से वसूली कर दिल्ली पहुंचाना रह गया है, जबकि यहाँ का मूल निवासी और होनहार युवा आज भी सड़कों पर बेरोजगार घूम रहा है। हालात यह हो चुके हैं कि यह जन और पहाड़ विरोधी सरकार हरियाणा से पोस्टमैन और गुजरात से ठेकेदार लाकर उत्तराखंड के लोगों के सिर पर बिठा रही है। अब समय आ गया है जब राज्य को बारी-बारी से लूटने वाली भाजपा और कांग्रेस दोनों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।
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’42 शहादतों के बाद मिला राज्य, सरकारी संपत्तियां भी बेच खाईं’
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने आंदोलन के दिनों को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि 42 लोगों की शहादतों और लंबे संघर्ष के बाद हमें यह उत्तराखंड राज्य मिला था। इसका गठन जल, जंगल, जमीन के संरक्षण और पहाड़ों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए हुआ था। लेकिन संरक्षण तो दूर, भाजपा सरकार ने राज्य के पास बची हुई सरकारी संपत्तियों को भी कौड़ियों के दाम बेच दिया है। आज स्थिति यह है कि पहाड़ के सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लगातार बंद हो रहे हैं और सरकारी अस्पताल खुद अपने इलाज के लिए तरस रहे हैं। महंगाई और बेरोजगारी ने आम आदमी का जीना दुश्वार कर दिया है।
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शीर्ष नेताओं ने किया स्वागत, जनता को यूकेडी से बंधी उम्मीद
वहीं, पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार इस कदर चरम पर है कि आम आदमी की आवाज सुनने वाला कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं बचा है। जनता अब तीसरे विकल्प के रूप में यूकेडी की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।
तारा सिंह नेगी और उनके समर्थकों के उक्रांद में शामिल होने पर दल के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, डॉ. नारायण सिंह जंतवाल और पुष्पेश त्रिपाठी ने सभी नए सदस्यों का फूल-माला पहनाकर और दल का पटका पहनाकर संगठन में भव्य स्वागत किया। नेताओं ने साफ किया कि नेगी के आने से कुमाऊं क्षेत्र में दल को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इस महा-सभा का सफल और प्रभावी संचालन संयुक्त रूप से रवि बोरा और पुष्कर बिष्ट द्वारा किया गया।
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