संविधान की मर्यादा तार-तार’: वकील को हिरासत में भेजने पर नैनीताल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने की कड़ी निंदा
नैनीताल स्थित हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक शुक्रवार को एसोसिएशन सभागार में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष डी.सी.एस. रावत ने की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता को 24 घंटे की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की हालिया घटना थी, जिस पर नैनीताल के अधिवक्ताओं ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया।

सभा में मौजूद सभी कानूनविदों ने एक स्वर में इस कृत्य की घोर निंदा की और इसे न्यायिक गरिमा के प्रतिकूल बताया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं न केवल भारतीय संविधान की मर्यादा का उल्लंघन हैं, बल्कि यह न्यायपालिका और अधिवक्ता समाज के बीच के दशकों पुराने संतुलन और विश्वास को भी गहरी चोट पहुँचाती हैं।
महासचिव सौरव अधिकारी के कुशल संचालन में संपन्न हुई इस बैठक में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-अध्यक्ष डी.के. शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एम.एस. पाल विशेष रूप से सम्मिलित हुए। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए अधिवक्ता समाज का सम्मान अनिवार्य है और इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाइयां लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए चिंताजनक हैं।
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बैठक के अंत में सभी अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया और भविष्य में अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई। इस महत्वपूर्ण विमर्श के दौरान एम.सी. पंत, बी.एस. अधिकारी, योगेश पचोलिया, मीना बिष्ट, राजेश शर्मा, टी.एस. फर्त्याल, विश्वस्थ काण्डपाल, डी.एस. मेहता और गौरव काण्डपाल समेत भारी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।





