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Uttarakhand Administrative Concept Representing District Magistrate Office and Revenue Case Disposal in Nainital
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देवभूमि जन हुंकार, नैनीताल / हल्द्वानी / देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और प्रशासनिक जनपद नैनीताल से जिला प्रशासन की कार्यकुशलता और जन-कल्याणकारी नीतियों को दर्शाने वाले बेहद शानदार आंकड़े सामने आए हैं। जनपद नैनीताल में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के एक वर्ष के सफल कार्यकाल के दौरान राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण, अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, न्यायालयों में लंबित वादों के रिकॉर्ड निपटारे तथा जनता के बीच जाकर चौपालों के माध्यम से विरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया ने प्रशासनिक गतिविधियों में एक नई मिसाल कायम की है।

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न्यायालयों में 85.54 प्रतिशत वादों का सफल निस्तारण

प्रशासनिक रूप से उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक नैनीताल जिले के विभिन्न न्यायालयों में कुल 37,383 वाद विचाराधीन रहे。 जिला प्रशासन की मुस्तैदी के चलते इस अवधि में कुल 31,979 वादों का सफल निस्तारण कर दिया गया, जबकि केवल 5,404 वाद शेष रहे。 इस समूची अवधि में न्यायालयों द्वारा वादों के निस्तारण की कुल दर 85.54 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने की दिशा में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इसके अतिरिक्त, न्यायालय कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट, नैनीताल के स्तर पर भी राजस्व वर्ष के दौरान कुल 472 वादों में से 364 वादों का निपटारा किया गया, जिसमें जेडए एवं एलआर अधिनियम, गवर्नमेंट ग्रांट Act, गुंडा नियंत्रण अधिनियम तथा शस्त्र अधिनियम जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों से जुड़े मामले शामिल रहे।

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राजस्व प्रवर्तन के 97.67% मामलों का निपटारा, अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के नेतृत्व में राजस्व प्रवर्तन के मोर्चे पर अभूतपूर्व कार्य हुआ है। जनपद में 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक राजस्व प्रवर्तन समिति के अंतर्गत कुल 5,745 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें पिछले सप्ताह से लंबित 5,603 और इस अवधि में प्राप्त 142 नए प्रकरण शामिल थे। इनमें से कुल 5,611 प्रकरणों का पूरी तरह निस्तारण किया जा चुका है और मात्र 134 प्रकरण शेष हैं। इस प्रकार दर्ज मामलों में से लगभग 97.67 प्रतिशत मामलों का रिकॉर्ड निपटारा किया गया है।

सार्वजनिक संपत्तियों और बुनियादी ढांचा विकास में बाधक बन रहे अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है:

  • मार्गों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण: कुल 857 प्रकरणों में से 856 का निस्तारण किया गया, और इस श्रेणी में मात्र 1 मामला शेष है।

  • सिंचाई गूलों पर अतिक्रमण: कुल 83 मामलों में से 78 का निस्तारण किया गया।

  • मार्ग निर्माण में बाधा: कुल 71 प्रकरणों में से 70 का निस्तारण सुनिश्चित किया गया।

  • सार्वजनिक रास्ते और नहरें: सार्वजनिक रास्तों और नहरों में अतिक्रमण से जुड़े सभी 100 मामलों का 100% निस्तारण दर्ज किया गया है।

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पैमाइश, मेड़ विवाद और नाम संशोधन के मामलों में त्वरित राहत

आम नागरिकों को भूमि से जुड़ी छोटी-छोटी परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए राजस्व अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्य किया है। राजस्व प्रवर्तन के आंकड़ों में भूमि पैमाइश से जुड़े मामले सबसे अधिक संख्या में रहे:

  • भूमि पैमाइश: कुल 2,491 प्रकरणों में से 2,398 का निस्तारण किया गया।

  • मेड़ विवाद एवं खेत सीमाएं: कुल 957 प्रकरणों में से 945 का निपटारा किया गया।

  • कुर्री नक्शे: कुल 131 प्रकरणों में से 117 का निस्तारण हुआ।

  • नाम संशोधन: कुल 290 मामलों में से 284 का निपटारा किया गया।

  • अन्य श्रेणियां: 765 अन्य प्रकरणों में से 763 का निस्तारण सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

इन तमाम आंकड़ों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि जिलाधिकारी के कार्यकाल का मुख्य केंद्रबिंदु आम जनता के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े भूमि सीमांकन, पैमाइश, नाम संशोधन और अतिक्रमण मुक्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों का समयबद्ध समाधान रहा है।

गाँव-गाँव चौपाल लगाकर 34,897 लाभार्थियों की विरासत दर्ज ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी अभिलेखों को अद्यतन रखने और मृतक खातेदारों के उत्तराधिकारियों के नाम कानूनी रूप से दर्ज कराने के लिए प्रशासन द्वारा एक अनूठी पहल की गई। गांवों में चौपाल लगाकर विरासत दर्ज करने की विशेष प्रक्रिया चलाई गई, जिसके माध्यम से कुल 34,897 लाभार्थियों को उनकी भूमि पर मालिकाना हक और विरासत दर्ज कराने का सीधा लाभ मिला है। प्रशासन की इस जन-हितैषी और पारदर्शी कार्यशैली ने नैनीताल जनपद के नागरिकों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत किया है।

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By admin